Sunday, July 11, 2010

प्रेम



आप कहेंगे, हम सब प्रेम करते हैं। मैं आपसे कहूं, आप शायद ही प्रेम करते हों; आप प्रेम चाहते होंगे। और इन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है। प्रेम करना और प्रेम चाहना, ये बड़ी अलग बातें हैं। हममें से अधिक लोग बच्चे ही रहकर मर जाते हैं। क्योंकि हरेक आदमी प्रेम चाहता है। प्रेम करना बड़ी अदभुत बात है। प्रेम चाहना बिलकुल बच्चों जैसी बात है। छोटे-छोटे बच्चे प्रेम चाहते हैं। मां उनको प्रेम देती है। फिर वे बड़े होते हैं। वे और लोगों से भी प्रेम चाहते हैं, परिवार उनको प्रेम देता है। फिर वे और बड़े होते हैं। अगर वे पति हुए, तो अपनी पत्नियों से प्रेम चाहते हैं। अगर वे पत्नियां हुईं, तो वे अपने पतियों से प्रेम चाहती हैं। और जो भी प्रेम चाहता है, वह दुख झेलता है। क्योंकि प्रेम चाहा नहीं जा सकता, प्रेम केवल किया जाता है। चाहने में पक्का नहीं है, मिलेगा या नहीं मिलेगा। और जिससे तुम चाह रहे हो, वह भी तुमसे चाहेगा। तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। दोनों भिखारी मिल जाएंगे और भीख मांगेंगे। दुनिया में जितना पति-पत्नियों का संघर्ष है, उसका केवल एक ही कारण है कि वे दोनों एक-दूसरे से प्रेम चाह रहे हैं और देने में कोई भी समर्थ नहीं है।
इसे थोड़ा विचार करके देखना आप अपने मन के भीतर। आपकी आकांक्षा प्रेम चाहने की है हमेशा। चाहते हैं, कोई प्रेम करे। और जब कोई प्रेम करता है, तो अच्छा लगता है। लेकिन आपको पता नहीं है, वह दूसरा भी प्रेम करना केवल वैसे ही है जैसे कि कोई मछलियों को मारने वाला आटा फेंकता है। आटा वह मछलियों के लिए नहीं फेंक रहा है। आटा वह मछलियों को फांसने के लिए फेंक रहा है। वह आटा मछलियों को दे नहीं रहा है, वह मछलियों को चाहता है, इसलिए आटा फेंक रहा है। इस दुनिया में जितने लोग प्रेम करते हुए दिखायी पड़ते हैं, वे केवल प्रेम पाना चाहने के लिए आटा फेंक रहे हैं। थोड़ी देर वे आटा खिलाएंगे, फिर...। और दूसरा व्यक्ति भी जो उनमें उत्सुक होगा, वह इसलिए उत्सुक होगा कि शायद इस आदमी से प्रेम मिलेगा। वह भी थोड़ा
प्रेम प्रदर्शित करेगा। थोड़ी देर बाद पता चलेगा, वे दोनों भिखमंगे हैं और भूल में थे; एक-दूसरे को बादशाह समझ रहे थे! और थोड़ी देर बाद उनको पता चलेगा कि कोई किसी को प्रेम नहीं दे रहा है और तब संघर्ष की शुरुआत हो जाएगी। दुनिया में दाम्पत्य जीवन नर्क बना हुआ है, क्योंकि हम सब प्रेम मांगते हैं, देना कोई भी जानता नहीं है। सारे झगड़े के पीछे बुनियादी कारण इतना ही है। और कितना ही परिवर्तन हो, किसी तरह के विवाह हों, किसी तरह की समाज व्यवस्था बने, जब तक जो मैं कह रहा हूं अगर नहीं होगा, तो दुनिया में स्त्री और पुरुषों के संबंध अच्छे नहीं हो सकते। उनके अच्छे होने का एक ही रास्ता है कि हम यह समझें कि प्रेम दिया जाता है, प्रेम मांगा नहीं जाता, सिर्फ दिया जाता है। जो मिलता है, वह प्रसाद है, वह उसका मूल्य नहीं है। प्रेम दिया जाता है। जो मिलता है, वह उसका प्रसाद है, वह उसका मूल्य नहीं है। नहीं मिलेगा, तो भी देने वाले का आनंद होगा कि उसने दिया।
अगर पति-पत्नी एक-दूसरे को प्रेम देना शुरू कर दें और मांगना बंद कर दें, तो जीवन स्वर्ग बन सकता है। और जितना वे प्रेम देंगे और मांगना बंद कर देंगे, उतना ही--अदभुत जगत की व्यवस्था है--उन्हें प्रेम मिलेगा। और उतना ही वे अदभुत अनुभव करेंगे-

15 comments:

Anonymous said...
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Anonymous said...

main aapki baat se sehmat nahin hu

Pawan Kumar said...

janab agar aap meri baat se sehmat nahin hain to apna naam batayen

प्रदीप अवस्थी said...

prem mangne se kabhi nhi milta.........

zindagi-uniquewoman.blogspot.com said...

pawan ji....me aapse sahmat nahi hu....ye teek hai ki prem chahne se nahi milta..iske liye partner k liye loyal n devote hona bahut jaruri hai tabi ye possible hai ki koi apko chahega....bt ek shikayat hai...ki jis tarah k words aapne use kiye hai usse ye lag raha h ki jaise aapne kabi real love n dekha hai na hi feel kiya hai...warna aap kabi aisa artical nahi likhte...
anyway sorry...artical padne ke bad mai khud ko rok nai pai apne views dene se...

अविनाश वाचस्पति said...

प्रेम को टिप्‍पणी मानकर देखेंगे तो आप सभी को इसमें खूब सौंदर्य दिखलाई देगा। पवन जी ने कहा है और डटे हुए हैं, हवा नहीं हुए हैं, वे इस इंतजार में हैं कि प्रेम टिप्‍पणी है, या टिप्‍पणी प्रेम है जबकि असल प्रेम रचना है, संरचना है। अब बतलायें कि इस प्रेम के संबंध में आपका क्‍या मन बना है ?

अविनाश वाचस्पति said...

प्रेम को टिप्‍पणी मानकर देखेंगे तो आप सभी को इसमें खूब सौंदर्य दिखलाई देगा। पवन जी ने कहा है और डटे हुए हैं, हवा नहीं हुए हैं, वे इस इंतजार में हैं कि प्रेम टिप्‍पणी है, या टिप्‍पणी प्रेम है जबकि असल प्रेम रचना है, संरचना है। अब बतलायें कि इस प्रेम के संबंध में आपका क्‍या मन बना है ?

Pawan Kumar said...

archna ji acha laga k aapne mere article ko dhyan se padha, magar uski theme ko thoda sa samajh nahin ppayi aap, maine ye kahan hai k pyar maanga nahin jata, ye bin maange hi hota hai, jo kabhi bhi kisi ka bhi ho sakta hai,

khair chodo sabki prem ko lekar apni apni thinking hai, meri thinking jo thi wo aapne pad li, ab ye kisi ko achi bhi lag sakti hai or buri bhi.....

Pawan Kumar said...

hmmmmm avinash ji aapki baton me dum hai, u r rite

zindagi-uniquewoman.blogspot.com said...

pawan ji....mene aapki theme ko samjh kar hi comment likha tha.actually prem me bhikh jaise words ko me digest nahi kar pati so itna likh bethi....jab kisi ko real love diya jata hai....to samne wala bhi yahi chahega ki use real love mile....ye but natural bat hai...otherwise jnte hai kya hota hai hum dil se mar jate hai....return me real ki jagah real love nahi milta to zindagi bhojh lagne lagti hai....isliye isse acha to ye hai ki ya to kisi ko chahho hi nahi phir kisi k liye kuch karne ki jarurat hi nahi h....me isse bhikh nahi kahti...ise aap ye kah sakte hai ki "proper communication is very much necessary in between partners."agar aap samne wale se shikayat nahi kah sakte...use samjh nahi hogi to use pyar ki duniya se parichit karana to partner ka hi kam hai...shadiya to todi nahi jati....but unhe khubsurat mod to apka partner hi dega na...phir wo bhikh kaise hui....

zindagi-uniquewoman.blogspot.com said...

actually marriages tutti bhi isliye hi hai coz couple proper way me communicate hi nahi karte...ise bhikh mai isliye nahi man sakti coz ek partner dusre se kuch kahna chahe ya apne feelings samjhana chahe to ye bhikh kaise ho sakti hai....itna jarur hai ki wo samjhana sirf un dono ka aapas me hona chahiye....kisi tisre ki koi jagah nahi ya koi duniya nahi...anyway ye discussion kabhi end nahi hoga....ye aapke thoughts hai....humare thoughts thore differ hai...theme ek hi hai...obviously aapke article ko padne k bad me khud ko rok nahi pai....words apneap bante chale gaye...thanks...

Pawan Kumar said...

sahi kahan aapne iss mudde ka koi ant nahin, waise main aapki baaton se bhi sehmat hu.

or haan aapne kaha tha k shayad aapne kabhi kisi se pyar nahin kiya, aapko bata du k maine pyar bhi kiya or jisse pyaar kiya usse shadi bhi ki thi, magar ye baat or hai k hamara pyaar na to bhagwaan ko raas aaya or na hi hamarey samaaj ki panchyat ko, natiza aaj ye hai k ek bhagwaan k paas hai or dusra bhagwaan k insaano se lad raha hai

Apanatva said...

are bhaiya ek unconditional love bhee hota hai...........
pata nahee kyo ye aajkal nazar nahee aata........shayad ise hath lo us hath do kee theory jyada prachlit hai......
blog jagat par bhee iseka asar dekh sakte hai...........

Pawan Kumar said...

u r rite apnatva ji

Prarthana gupta said...

care is another word of love,for me..it varies from person to person their relationships n situations....