Thursday, September 28, 2017

क्या आपको पता है ?

क्या आपको पता है? प्रधुम्न( रेयान स्कूल गुरुग्राम)की लड़ाई उसके माता पिता ही लड़ रहे हैं? पर न तो पप्पू आया ना केजरी ना माया ममता, ओवैसी या समाजवादी या लालूवादी। और ना ही इनका कोई बयान?????? पता है क्यों? क्योकि प्रधुम्न एक सामान्य हिन्दू परिवार से था।। न मुस्लिम, न क्रिश्चियन या दलित! उसकी हत्या वोट तो दिलाती नहीं! यह सब लोग तो "रोहिंग्या आग" लगाने में व्यस्त हैं धिक्कार है ऐसे मक्कार और मौकापरस्त नेताओं पर

Thursday, May 4, 2017

अरविंद यानी कमल और कमल यानी बीजेपी और बीजेपी यानी नरेंद्र मोदी

सर जी इन दिनों अपने नाम के एक अर्थ को लेकर काफी परेशान है। परेशान भी क्यों न हो, जिस बीजेेपी और कमल के निशान की वह अक्सर खिलाफत करते हैं, अपने नाम की वजह से उनका बीजेपी से एक गहरा नाता जो जुड़ गया है। सरजी को उस समय से काफी टेंशन है, जब से उन्हें किसी ने बताया है कि संस्कृत मेंं कमल का मतलब अरविंद होता है। अरविंद यानी कमल और कमल यानी बीजेपी और बीजेपी यानी नरेंद्र मोदी। अब इन्हीं से तो इनकी लड़ाई चल रही है। हर बात के लिए मोदी जी को जिम्मेदार ठहराने वाले सर जी को अगर किसी ने सरेराह कह दिया कि आपके नाम का मतलब भी कमल है तो वे क्या जवाब देंगे। क्या अपना नाम भी बदल देंगे?

Wednesday, April 19, 2017

अयोध्या राममंदिर विवाद सुलझाने के लिए हो चुके हैं 9 असफल प्रयास



पवन कुमार, नई दिल्ली 

अयोध्या में राम मंदिर विवाद को बीते दिनों कोर्ट के बाहर निपटाने की चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने सलाह दी थी। ऐसा नहीं है कि राम मंदिर विवाद को सुलझाने के कभी प्रयास नहीं हुए। बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि यह विवाद देश की आजादी से भी बहुत पहले शुरू हो गया था। करीब 150 साल पुराने इस विवाद का सुलझाने का प्रयास आजादी से पहले 1859 में ब्रिटिश सरकार भी कर चुकी है। मगर वह असफल रही थी।

 इतना ही नहीं देश के तीन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, चंदशेखर और पीवी नरसिम्हा राव भी इस विवाद को कोर्ट के बाहर हल करने के लिए पहल कर चुके हैं, मगर सफल नहीं हुए। इस विवाद को लेकर वोटबैंक की राजनीति इतनी हावी है कि हर बार असफलता ही हाथ लगती है।



 राम मंदिर विवाद के करीब 150 साल के इतिहास में अब तक हुए समझौतों के प्रयास- 

 1- रामजन्म भूमि पर कब्जे को लेकर सबसे पहले विवाद 1859 में हुआ था। उस समय ब्रिटिश सरकार ने मध्यस्थता करते हुए एक कच्ची दिवार बनाई और तय किया कि अंदर का हिस्सा मुसलमानों का और बाहर का हिस्सा हिंदुओं का। मगर यह व्यवस्था लोगों को रास नहीं आई। महंत रघुवरदास ने 1885 में राम चबूतरे पर एक छत्र का निर्माण करने के लिए अनुमति प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश कोर्ट में याचिका दायर की।

 2- 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने विवाद के समाधान की कोशिश की जब विश्व हिन्दू परिषद के स्वयंसेवकों ने बाबरी मस्जिद के आशिंक हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया। लेकिन वह प्रयास असफल रहा।

 3- विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना और बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर 1992 को को बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप देश भर में हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। इसके 10 दिनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राव ने इसकी जांच के लिए लिब्राहन आयोग का गठन कर दिया। 17 साल बाद जून 2009 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। लेकिन यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई।

 4- प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जून 2002 में अयोध्या सेल का गठन किया और शत्रुघ्न सिंह को हिन्दू और मुस्लिम नेताओं से बातचीत की जिम्मेदारी सैंपी। लेकिन यह पहल महज घोषणा तक ही सीमित रह गई।

 5- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 26 जुलाई 2010 को सभी पक्षों को शांतिपूर्वक इस मामले को सुलझाने को कहा, पर किसी ने रूचि नहीं ली। कोर्ट ने कहा कि 24 सितंबर को फैसला सुनाया जाएगा।

 6- सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को 23 सितंबर 2010 को कोर्ट के बाहर सुलझाने की याचिका दायर की गई। तब कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और इलाहाबाद हाईकोर्ट को अपना आदेश देने को कहा।

 7- इस मामले में 24 फरवरी 2015 को मुस्लिमों के पक्षकार मोहम्मद हासिम अंसारी ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञान दास से मुलाकात की और इस विवाद के हल के लिए नए प्रस्ताव पर चर्चा की। लेकिन कोर्ट के बाहर समाधान की कोशिश बेकार रही।

8- अयोध्या में 10 अप्रैल 2015 को दोनों ही ओर के पक्षकारों ने विवाद के समाधान के लिए एक बार फिर बातचीत शुरू की। हिन्दुओं के मुख्य पक्षकार हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी ने मुस्लिम पक्षकारों से मुलाकात की। लेकिन पहली ही बैठक के बाद यह प्रयास भी बेनतीजा रहा।

9- 31 मार्च, 2016 को दोनों ही पक्षों के नेता फिर मिले। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने हाशिम अंसारी से मिले। इस पहल में कोई बात आगे बढ़ती कि हाशिम अंसारी का इंतकाल हो गया।

Friday, April 14, 2017

ट्रम्प द्वारा बमो की अम्मी का प्रयोग

ट्रम्प के MOAB (मदर ऑफ़ ऑल बम) के गिरने के बाद पाकिस्तान कह रहा है कि अफगानिस्तान के 500 लोग मरे हैं। वहीँ अफगानिस्तान कह रहा की ट्रम्प के सभी बमो की अम्मी द्वारा किये गए हमले में पाकिस्तान के 500 लोग मर गए। वहीँ ट्रम्प वाइट हाउस में प्याज के पकोड़े खाते हुए सोच रहा है कि जब दोनों ही देशों से कोई नहीं मरा, तो मरने वाले 500 कोन देश के थे। ट्रम्प ने पुदीने की चटनी मंगाई और कहा कि इ तो कंफर्म है कि 500 मरे हैं। जब कोई जिम्मेवारी नहीं लेगा तो 2 चार बमो की अम्मी और गिरा दी जाए। सूचना फनहित में जारी,,,,,,,,,

सड़ जी का अप्रैल फूल

सड़ जी के अथक प्रयासों के बाद आखिरकार वजीर-ए-आला ने EVM का चुनाव में प्रयोग न करने का लॉलीपॉप उन्हें दे दिया है। सड़ जी को विश्वास दिलाया गया है कि राष्ट्रपति चुनाव में EVM का इस्तेमाल नहीं होगा। 😂😂😂

सड़ जी बहुत खुश थे कि उनकी एक मांग मान ली गई है। (ये अलग बात है कि राष्ट्रपति चुनाव में इसकी जरुरत नहीं पड़ती) अब सड़ जी खुश थे कि उनकी मांग स्वीकार होने की प्रथम सीढ़ी उन्होंने चढ़ ली है। सड़ जी ने अति उत्साह में कैबिनेट की बैठक बुला ली और कहा कि मांगों की लिस्ट बनाओ, वजीर-ए-आला को भेजनी है। उन्होंने हमें राष्ट्रपति चुनाव में EVM का प्रयोग न करने का भरोसा दिलाया है। सड़ जी की इसी बात पर सभी चुप। एक मंत्री ने तो अपने बचे-खुचे बाल भी नोच डाले। कुछ ने तो सातवीं मंजिल से छलांग लगा दी। 
सड़ जी हैरान, आखिर ये सब क्यों हो रहा है। सबको खुश होना चाहिए था। तभी एक सेवादार आया और बोला " हुजूर, जान की सलामती की दुआ मिले तो कुछ अर्ज करू।" सड़ जी का इशारा पाकर सेवादार बोला- हुजूर, राष्ट्रपति चुनाव में तो EVM इस्तेमाल नहीं होता। 

अब सड़ जी को समझ आया कि उन्हें अप्रैल फूल बनाया गया है। उन्होंने तुरंत फरमान सुनाया कि इस बात को गोपनीयता की श्रेणी में रख दिया जाये। ये बात बाहर न जाये और न ही RTI में इसकी जानकारी दी जाये। 

नोट- इस घटना के सभी पात्र काल्पनिक हैं। जिनका किसी वास्तविक व्यक्ति से कोई लेना-देना नहीं है। अगर कोई इसे खुद की या अपने किसी प्रिय की घटना मान भी लेता है तो उससे मुझे फर्क नहीं पड़ेगा। 😂😂😂

सूचना- फनहित में जारी