Saturday, April 25, 2009

जिंदगी की यही रीत है...


चाट चाट मेरी जान चाट आखिर गिलहरी का भी तो मन करता है कोई उसे प्यार करे...


ये जीवन है...इस जीवन का यही है यही है....यही है रंग रूप

आज तो मई पता करके ही रहूँगा ये है क्या आखिर...इसमे ये कौन है...

थोडे गम है थोडी खुशियाँ...यही है यही है यही है रंग रूप...



मेरे लाल से तो सारा जग झिलमिलाये...


इन सभी फोटो के कैप्शन मेरे भाई अज्येंदर शुक्ला ने लिखे हैं। इसके लिए उनका धन्यवाद्।

3 comments:

Ajayendra Rajan said...
This comment has been removed by the author.
Ajayendra Rajan said...

thanks bhai...

jayram said...

chat meri jaan " yahi hai kudrat ka khel ! kya prem hai sarp aur gilahri mein par ham insan kitne girte ja rahe hai ! ye taswire prakrtit ke wiwidh rupo ko sanjoye hame jiwan ka kai rahasya ko samjhane mein safal hai .............. pahli bar aapki ankhi bato ko jana achcha laga ......................