Sunday, March 8, 2009
अब अदालतें भी चलेंगी डे एंड नाईट
अदालतों को मुक़दमे के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए बहुत से वैकलिपिक उपाय अपनाए जा रहे हैं, और उनका परिणाम भे धीरे धीरे सामने आ रहा है। अदालतों के बदलते स्वरुप और नई तकनीकों पर जल्दी ही एक अलग विस्तृत आलेख लिखूंगा। बहुत पहले ही पश्चमी देशों के तर्ज़ पर सांध्य कालीन अदालतों के गठन के बात चली थी ,मगर जैसे की यहाँ हर नयी योजना का हश्र होता है सो इस योजना के लागोकरण में खासे डेरी हुई, मगर गुजरात के बाद अब राजधानी की जिला अदालतों में भी जल्दी ही सांध्य कालीन अदालतें शुरू होने जा रही हैं, फिलहाल तो ये सिर्फ़ दो अदालतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की जा रही हैं, जिनका परिणाम देखने के बाद इन्हें आगे भी बह्दय जाएगा। ये शाम की अदालतें पाँच बजे से लेकर आठ बजे तक चलेंगी।जहाँ तक इनमें मुकदमों की सुनवाई की बात है , जैसे की भाई दिनेस जी अपने चिट्ठे तीसरा खम्भा में भी जिक्र कर चुके हैं की आज किसी भी अदालत के लिए लोन वाले चैक बाउंसिंग के मुक़दमे की बढ़ती तादाद ही सबसे बड़ी चुनौते बनी हुई है, सो निर्णय ये किया गया है की सबसे पहले इनसे ही निपटा जाए। इसलिए इन सांध्यकालीन अदालतों में १३८ नेगोसिअबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत आने वाले मुकदमों का निपटारा किया जागेगा। चैक की राशि के हिसाब से अलग अलग अदालतों में इनकी सुनवाई की जायेगी। विदित हो की सबसे ज्यादा मुक़दमे , विभिन्न बैंकों, और लोन प्रदाता कम्पनियों के हैं और इनके लिए भी विशेष व्यवस्था करते हुए इनकी सुनवाई अलग कर दी गयी है, ताकि एक आम आदमी को इनके बीच न पिसना पड़े।इन सांध्यकालीन अदालतों का दूसरा फैयदा ये होगा की जो लोग दिन में अपने काम काज की वजह से अदालत नहीं पहुँच पाते हैं , उनके लिए ये आसान हो जायेगा की अपना काम निपटने के बाद वे अदालत की तारीख भी भुगत सकेंगे। ये ऐतिहासिक कदम अदालत के और लोगों के कितने काम आत्येगा ये तो भविष्य की बात है , किंतु इतना जरूर है की इन उपायों से ये तो लगता है की अदालतें भी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझते हुए सारे उपाय करने को प्रत्बध हैं।
By- Pawan kumar
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